महामहिम,
श्रीमती प्रतिभा सिंह देवी पाटिल,
भारत सरकार
राष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली
विषय : पाकिस्तानी हिन्दुओं के मानवाधिकार हनन, उत्पीड़न, यौन शोषण, धर्मान्तरण के सन्दर्भ में
महोदय,
सविनय निवेदन है कि १५ अगस्त १९४७ को हिन्दुस्थान का विभाजन कांग्रेस, मुस्लिम लीग और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के कारण हुआl हिन्दू महासभा ने उस समय भी विभाजन का मुखर विरोध किया था, कांग्रेस कार्य समिति में कांग्रेस ने भी स्वीकार किया था कि विभाजन अल्पकाल के लिए हो रहा है और पुनः भारत अखंड होगा l
१९४६ में भी कांग्रेस ने अखंड हिन्दुस्थान के लिए वोट माँगा था, फिर भी राष्ट्र के विभाजन का पाप किया
हिन्दुस्थान के विभाजन का उस समय हिन्दू महासभा द्वारा जो विरोध किया गया और जो अनुमान लगाये गए वो आज पुर्णतः सत्यापित हो रहे हैं, विभाजन के समय जो जघन्यता और क्रूरता इस्लामी कट्टरपंथियों द्वारा हिन्दुओं के प्रति दिखाई गयी दिखाई गयी थी वो आज भी निरंतर गतिशील है l
डाक्टर बाबा साहेब भीमराव रामजी अम्बेडकर द्वारा सुझाए गये मार्ग को उस समय कि सरकार ने अपने स्वार्थों को सिद्ध करने और सत्ता-लोलुभता के चलते त्याग दिया था, मैं विस्तृत विवरण में नहीं जानता चाहता क्योंकि आप विदूषी आदरणीय महिला हैं और भारत कि प्रथम नागरिक हैं.... अतः सम्पूर्ण विषय आपके संज्ञान में है l १५ अगस्त १९४७ के पहले ये सभी भारतीय थे l हमारी कूटनीतिक विफलता के कारण आज ये भारतीय नही हैं l कांग्रेस ने अपनी कार्य-समिति में निर्णय लिया था, उस निर्णय के तहत इन हिन्दुओं के मानवाधिकारों का रक्षण करने का दायित्व आपका है l
आसिन्धु-सिन्धु पर्यन्ता यस्य भारत भूमिका। पितृ भू: पुन्यभूशचैव स वै हिन्दुरिति स्मृत:।।
अर्थात सिन्धु के उदगम स्थान से समुद्र पर्यन्त जो भारत भूमि है उसे जो पितृ-भूमि तथा पुण्य-भूमि मानता है, वह हिन्दू कहलाता है।इस प्रकार कि समस्या युगांडा के तानाशाह ईदी अमीन द्वारा उपस्थित कर दी गयी थी, और हिन्दुओं को राष्ट्र से निष्कासित कर दिया गया था l
उस समय हिन्दुस्थान कि प्रधान मंत्री माननीय श्रीमती इंदिरा गाँधी थीं, हमारे तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष आचार्य बालाराव सावरकर जी थे, उन्होंने श्रीमती गांधी को तार एवं पत्र के माध्यम से आग्रह किया कि इनकी मात्रभूमि नहीं है किन्तु इनकी पितृभूमि है अतः माननीय दृष्टिकोण के तहत इनको हिन्दुस्थान कि नागरिकता दी जाए, जिसको श्रीमती गांधी ने अपने तत्काल प्रभाव से ५०००० युगांडा के हिन्दुओं को हिन्दुस्थान कि नागरिकता दी, जो भारत के इतिहास में एक एतिहासिक तथ्य है l
श्रीमती गांधी का यह एतिहासिक निर्णय वसुधैव कुटुम्बकम के सिद्धांत को स्वीकार करता है यही भारतीय सिद्धांत है l जिस प्रकार भेड़िये के द्वारा अपने शिकार को घेर कर मारा जाता है उसी प्रकार से इस्लामिक साम्राज्यवादी जिहादी मुसलमानों के द्वारा हिन्दुओं पर बर्बर अत्याचार हो रहा है जो कि आपके संज्ञान में है l
वसुधैव कुटुम्बकम और अतिथि देवो भव: ये हमारे प्राचीन भारतीय सिद्धांत हैं और इसकी आप मूर्तिमान स्वरूप हैं l ८ सितम्बर २०११ को पकिस्तान से ११९ हिन्दुओं ने तीर्थयात्रा वीजा के बहाने प्राण रक्षा हेतु पुण्यभूमि - पित्रभूमि भारत में आगमन किया l इनमे से अधिकतर हिन्दुओं को धर्मांतरण हेतु भयंकर रूप से प्रताड़ित किया गया है, ये आजीवन उपेक्षा एवं उत्पीड़न के शिकार रहे हैं l पाकिस्तान में सम्पूर्ण हिन्दू समाज को शिक्षा, चिकित्सा, सुरक्षा तथा मानवाधिकारों से वंचित रखा गया है l हिन्दू बच्चों को शिक्षा के समय धर्मांतरण के लिए भयंकर प्रताड़ित किया जाता है और अमानवीय शारीरिक यातनाएं दी जाती हैं l
कुछ बच्चों के मोलवीयों द्वारा हुई पिटाई के कारण कान के पर्दे तक फट चुके हैं l
कुछ स्त्रियों के स्तन आदि कटे हुए हैं l इनमे से कई लोगों को जबरदस्ती हैपेटाईटिस - बी का इंजेक्शन लगा कर आजीवन रोगग्रस्त बना दिया गया है, इसके पीछे का उद्देश्य हिन्दुओं का वंश नाश है l विगत दिनों चार हिन्दू चिकित्सकों कि जघन्य हत्या इस्लामी कट्टरपंथियों ने सिंध प्रांत में की गई l कराची के चीफ मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट ने गत दिनों एक जन समारोह में यह स्वीकार किया है कि कराची महानगर के अन्दर प्रति दिन 100 से अधिक बलात्कार हिन्दू नारियों के किये जाते हैं, और अधिकतर को धर्मान्तरित कर दिया जाता है तथा प्रशासन द्वारा कोई कार्यवाही नहीं कि जाती l
माननीय आप एक मातृ शक्ति हैं, पुर्णतः आशा एवं विश्वास के साथ नम्र प्रार्थना एवं अनुरोध है कि पाकिस्तान से आये हुए असहाय, उत्पीड़ित और प्रताड़ित हिन्दू नागरिकों को केवल एकमात्र आपके द्वारा न्याय एवं सहयोग कि आशा में यह प्रार्थना पत्र आपको बहुत पीड़ा के साथ प्रस्तुत कर रहा हूँ, कि इनके वीजा कि अवधी को को विस्तार देकर इनको पित्रभूमि भारत में रहने हेतु नागरिकता प्रदान करने कि प्रक्रिया आरम्भ कि जाए l साथ ही आपसे नम्र अनुरोध करता हूँ कि पाकिस्तान में रह रहे 38 लाख हिन्दुओं कि शिक्षा, चिकित्सा, सुरक्षा एवं मानवाधिकारों के लिए पकिस्तान सरकार पर दबाव बनाया जाये l
यह सभी विषय विभिन्न समाचार पत्रों एवं इलेक्ट्रोनिक माध्यमो द्वारा ज्ञात हुआ है l
पंडित बाबा नंद किशोर मिश्र
(वरिष्ठ नेता, अखिल भारत हिन्दू महासभा)
Tuesday, December 20, 2011
Saturday, December 17, 2011
पाकिस्तानी हिन्दुओं पर टूटा यूपी पुलिस का कहर
गत माह पाकिस्तान से आये हुये कुल 151 हिन्दुओं को दिल्ली पुलिस को सूचना देकर गाजियाबाद के एक मंदिर में ले जाकर पुर्नस्थापित किया जा रहा था। इसके लिये उ0प्र0 के पुलिस को पहले से ही सूचित भी कर दिया गया था। मगर अर्धरात्रि में मायावती के मुगलिया फरमान पर यू0पी0 पुलिस ने उन पिछड़े, दलित हिन्दुओं पर जो अति बर्बर, अति जघन्यतम कार्रवायी की उसकी जितनी भी निंदा की जाये कम है। इतना ही नही आधी रात को पुलिस उन सब पर निर्दयतापूर्वक टूट पड़ी, उनके सारे मोबाइल फोन आदि छीन लिये और उन्हें एक गाड़ी में भरकर अक्षरधाम नेशनल हाइवे पर कड़कड़ाती सर्दी में छोड़कर चले गये। इन पुलिस अधिकारियों को उनके महिलाओं और छोटे-छोटे बच्चों पर जरा भी दया नही आयी कि ये खुले आसमान में कैसे रात गुजारेंगे।
ज्ञात रहे कि ये वही पाकिस्तानी हिन्दू थे जो पिछले कयी महीने से दिल्ली के मजनूटीले पर शरण लिये हुये थे। ये पाकिस्तान से वीसा पर हिन्दू तीर्थस्थलों पर भ्रमण के लिये आये हुये थे और पाकिस्तान नही जाना चाहते थे। क्योंकि पाकिस्तान में इस्लामी मुस्लिम गुण्डे आये दिन इनसे जजिया कर मांगा करते थे, इनके मां-बहन और बेटियों के अस्मत से भी खिलवाड़ करते थे। इनके कयी रिश्तेदारों को तालिबानी गुण्डों ने बेरहमी से कत्ल कर दिया था।
अर्ध रात्रि में इन पाकिस्तानी हिन्दुओं के साथ अमानवीय कार्रवायी पर अखिल भारत हिन्दू महासभा के वरिष्ठ नेता डॉ0 संतोष राय ने उ0प्र0 सरकार के गृहसचिव कुंवर फतेह बहादुर सिंह से बातचीत की तो उन्होंने आधे घंटे का समय मांगा और मदद का आश्वासन दिया। मगर कुछ समय बाद उन्होंने पाकिस्तानी हिन्दुओं के प्रति अपनी संवेदना जताते हुये कहा कि हमें मैडम माया ने डांटा कि विधानसभा का चुनाव है, हम इस वक्त कुछ भी मदद नही कर सकते, हम इनकी चाहकर भी मदद न करने पर मजबूर हैं।
ये पाकिस्तानी हिन्दू पाकिस्तान से लूटपिट कर, वहां के बर्बर अत्याचर से मुक्ति की आस से यहां आये थे कि उनकी मातृभूमि भारत में उन्हें शरण मिलेगी मगर इनके साथ मैडम मायावती ने जो अमानवीय, जघन्यतम व्यवहार कराया वो कभी नही भूलाया जा सकता। ज्ञात रहे कि ये पाकिस्तानी हिन्दू दलित और पिछड़े समुदाय से हैं। हिन्दू महासभा ने इस घटना की तीव्र भत्र्सना करते हुये कहा कि मायावती दलितों और पिछड़ों की घोर विरोधी है। गाजियाबाद के एसपी सिटी ने भी कहा कि इन पाकिस्तानी हिन्दुओं की मदद तो हम भी करना चाहते हैं मगर मुख्यमंत्री मायावती के आदेश के आगे हम कुछ नही कर सकते। यही नही गाजियाबाद पुलिस ने हिन्दू महासभा के नेताओं को धमकाते हुये कहा कि यदि इन हिन्दुओं को यहां से भगाने में आपसब लोगों ने व्यवधान डाला तो आप सबके उपर मुकदमा चलाया जायेगा।
एक उच्चाधिकारी ने अपना नाम छिपाते हुये कहा कि यदि ये मुस्लिम मजहब के होते तो माया हो या मुलायम या मैडम सोनिया सबके आंखों के ये तारे हो जाते। इन्हें यहां बसाया भी जाता और यहां की नागरिकता भी प्रदान की जाती जैसे कि राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बांग्लादेशी मुसलमानों के साथ किया था।
ज्ञात रहे कि ये वही पाकिस्तानी हिन्दू थे जो पिछले कयी महीने से दिल्ली के मजनूटीले पर शरण लिये हुये थे। ये पाकिस्तान से वीसा पर हिन्दू तीर्थस्थलों पर भ्रमण के लिये आये हुये थे और पाकिस्तान नही जाना चाहते थे। क्योंकि पाकिस्तान में इस्लामी मुस्लिम गुण्डे आये दिन इनसे जजिया कर मांगा करते थे, इनके मां-बहन और बेटियों के अस्मत से भी खिलवाड़ करते थे। इनके कयी रिश्तेदारों को तालिबानी गुण्डों ने बेरहमी से कत्ल कर दिया था।
अर्ध रात्रि में इन पाकिस्तानी हिन्दुओं के साथ अमानवीय कार्रवायी पर अखिल भारत हिन्दू महासभा के वरिष्ठ नेता डॉ0 संतोष राय ने उ0प्र0 सरकार के गृहसचिव कुंवर फतेह बहादुर सिंह से बातचीत की तो उन्होंने आधे घंटे का समय मांगा और मदद का आश्वासन दिया। मगर कुछ समय बाद उन्होंने पाकिस्तानी हिन्दुओं के प्रति अपनी संवेदना जताते हुये कहा कि हमें मैडम माया ने डांटा कि विधानसभा का चुनाव है, हम इस वक्त कुछ भी मदद नही कर सकते, हम इनकी चाहकर भी मदद न करने पर मजबूर हैं।
ये पाकिस्तानी हिन्दू पाकिस्तान से लूटपिट कर, वहां के बर्बर अत्याचर से मुक्ति की आस से यहां आये थे कि उनकी मातृभूमि भारत में उन्हें शरण मिलेगी मगर इनके साथ मैडम मायावती ने जो अमानवीय, जघन्यतम व्यवहार कराया वो कभी नही भूलाया जा सकता। ज्ञात रहे कि ये पाकिस्तानी हिन्दू दलित और पिछड़े समुदाय से हैं। हिन्दू महासभा ने इस घटना की तीव्र भत्र्सना करते हुये कहा कि मायावती दलितों और पिछड़ों की घोर विरोधी है। गाजियाबाद के एसपी सिटी ने भी कहा कि इन पाकिस्तानी हिन्दुओं की मदद तो हम भी करना चाहते हैं मगर मुख्यमंत्री मायावती के आदेश के आगे हम कुछ नही कर सकते। यही नही गाजियाबाद पुलिस ने हिन्दू महासभा के नेताओं को धमकाते हुये कहा कि यदि इन हिन्दुओं को यहां से भगाने में आपसब लोगों ने व्यवधान डाला तो आप सबके उपर मुकदमा चलाया जायेगा।
एक उच्चाधिकारी ने अपना नाम छिपाते हुये कहा कि यदि ये मुस्लिम मजहब के होते तो माया हो या मुलायम या मैडम सोनिया सबके आंखों के ये तारे हो जाते। इन्हें यहां बसाया भी जाता और यहां की नागरिकता भी प्रदान की जाती जैसे कि राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बांग्लादेशी मुसलमानों के साथ किया था।
Monday, December 12, 2011
Attack on parliament.............
काला अध्याय था संसद पर हमला
* तत्कालीन सहायक निदेशक (सुरक्षा) के अनुसार हमले के दौरान कई सांसद व अफसर गए थे सहम
आज से ठीक दस साल पहले दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के मंदिर पर हुआ हमला आजाद भारत के इतिहास का सबसे काला अध्याय है। यह कहना है 13 दिसंबर 2001 को लोकसभा में सहायक निदेशक (सुरक्षा) रण सिंह देसवाल का। आज समाज से खास बातचीत में देसवाल ने बताया कि आतंकी हमले के दौरान संसद भवन में मौजूद अनेक सांसद, मंत्री व उच्चाधिकारी सहमे हुए थे, मगर बावजूद इसके किसी ने हिम्मत नहीं हारी।
यहां बता दें कि देसवाल मूल रूप से बहादुरगढ़ के गांव खेड़ी जसोर के रहने वाले हैं और फिलहाल बहादुरगढ़ के सेक्टर-6 में निवास कर रहे हैं। देसवाल को देशभक्ति का जज्बा विरासत में मिला है। उनके पिता चौ. देवी सिंह व दादा चौ. रिसाल सिंह स्वतंत्रता सेनानी के रूप में देश की सेवा कर चुके हैं। आसोदा से प्राथमिक शिक्षा लेने के बाद सोनीपत व रोहतक से उच्च स्तरीय शिक्षा प्राप्त करने के बाद देसवाल 12 नवंबर 1978 तक आर्मी मेडिकल कौर में रहे। 27 अगस्त 1979 को उन्होंने लोकसभा में सुरक्षा सहायक के तौर पर नियुक्ति प्राप्त की और 18 अक्तूबर 1998 को उप निदेशक सुरक्षा के पद पर पदोन्नत हुए। 13 नवंबर 2001 को सुबह साढ़े 11 बजे के वाक्या को याद करते हुए देसवाल ने बताया कि उस समय वह सदन के भीतरी क्षेत्र के सुरक्षा प्रभारी थे। उन्हें प्रधानमंत्री को राज्यसभा तक ले जाना था, मगर हो-हल्ला होने के बाद लोकसभा व राज्यसभा की कार्रवाई स्थगित कर दी गई थी। इसी लिए जब हमला हुआ तो उस समय वह केंद्रीय कक्ष में सांसदों के साथ मौजूद थे। जब पहली बार गोली की आवाज आई तो उन्होंने सोचा कि किसी गाड़ी का टायर फटा होगा मगर जब दोबारा गोलीबारी सुनाई दी तो उन्हें आशंका हुई कि मामला गड़बड़ है। उन्होंने गेट पर संपर्क साधा और आतंकी हमले की सूचना मिलते ही संसद के सभी भीतरी दरवाजे बंद करवा दिए। इस बीच उन्होंने तत्कालीन गृहमंत्री लालकृष्ण आडवाणी व संसदीय कार्य मंत्री प्रमोद महाजन से वाकीटाकी पर संपर्क स्थापित किया और तमाम अति महत्वपूर्ण व्यक्तियों को विशेष सुरक्षा घेरे में सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया। पूरे घटनाक्रम को याद करते हुए देसवाल ने बताया कि आतंकियों का सबसे पहले विरोध तत्कालीन उप राष्टÑपति कृष्णकांत के सुरक्षाकर्मियों ने किया। सुबह 11 बजकर 40 मिनट पर हुए इस हमले से उभरते हुए मात्र बीस मिनट में सुरक्षाकर्मियों ने पांचों आतंकियों को मौत के घाट उतार दिया। वारदात के तुरंत बाद तत्कालीन रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस व पेट्रोलियम मंत्री रामनाइक ने देसवाल को साथ लेकर शवों का निरीक्षण किया।
नहीं तो होती ज्यादा क्षति
देसवाल ने बताया कि गेट नंबर 8 पर तैनात सीआरपीएफ के सिख जवान के सामने से एक आतंकवादी शरीर पर विस्पोटक पदार्थ बांधे संसद में भीतर घुसने का प्रयास कर रहा था तो उस जवान ने अपनी जान की बाजी लगाते हुए आतंकी पर हमला बोल दिया, जिसमें उसे गोली भी लगी। मगर बुलटप्रूफ जाकेट के चलते जवान बच गया और उसने आत्मघाती आतंकी को वहीं ढेर कर दिया।
हमले में शहीद होने वाले
सुरक्षा सहायक जगदीश प्रसाद यादव निवासी नीम का थाना राजस्थान, मतबार नेगी निवासी नई दिल्ली, कमलेश कुमारी सिपाही सीआरपीएफ निवासी कन्नोज यूपी, एएसआई नानकचंद निवासी सोनीपत हरियाणा, रामफल निवासी फरीदाबाद हरियाणा, हवलदार घनश्याम निवासी मथुरा, ओमप्रकाश निवासी नरेला, बिजेंद्र निवासी बदरपुर व माली देसराज निवासी गाजियाबाद इस हमले में शहीद हुए थे।
हमले में घायल होने वाले
इस हमले में एसआई पुरुषोत्तम, एएसआई जीतराम, हवलदार सुमेर सिंह, कमल सिंह, सिपाही रजत वशिष्ट, अस्सिटेंट कमाडेंट आनंद झा, सिपाही राकेश, महिपाल, हंसराज, एआईजी एनएमएस नायर, सीआरपीएफ का हवलदार वाईबी थापा, सिपाही सुखविंदर, एआर चियारी के अलावा आम नागरिक संजीव, पुरुषोत्तम पांडे व विक्रम भी इस हमले में घायल हुए थे।
प्रशस्ति पत्र मिला, पैसा नहीं
लोकसभा में उपनिदेशक (सुरक्षा) रण सिंह देसवाल को 26 अगस्त 2002 को तत्कालीन लोकसभा अध्यक्ष मनोहर जोशी ने प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। वहीं 12 फरवरी 2002 को लोकसभा अध्यक्ष द्वारा देसवाल को आतंकी हमले के दौरान बहादुरी के लिए 50 हजार रुपए का आर्थिक सम्मान देने की घोषणा की गई थी, मगर आज तक उन्हें यह राशि नहीं मिली।
Monday, November 14, 2011
अय्याश विजय माल्या
सरकार क्यों इस अय्याश विजय माल्या को २००० करोड़ रुपये देने पर विचार कर रही है ! जिस व्यक्ति का सारा समय अश्लील कैलेण्डर बनाने में बीतता हो....उसे किस बात की मदद दी जा रही है ! इसकी कम्पनी डूब जाए तो डूबने do , गरीबो का पैसा इसी काम के लिए है क्या ?
IPL के टीम खरीदो , नॉएडा में कार रेस कराओ..देर रात तक शराब और सुन्दरी की पार्टियों में सारा पैसा लगाओ तो कम्पनी को तो डूबना ही था , डूबने दो !
इसके कं...पनी किंगफिशर के ऊपर ६५०० करोड़ का कर्ज है ! सारा पैसा इसने और इसके बेटे ने रंगरेलिया माना माना कर डूबा दिया फिर सरकार क्यों अब इसकी सहायता कर रही है !
पिछले एक हफ्ते में किंगफिशर एयरलाइंस ने 200 उड़ानें रद्द की हैं। इसके बाद आशंका जताई जा रही है कि कंपनी दिवालिया हो सकती है। किंगफिशर 500 करोड़ रुपए के वर्किन्ग कैपिटल लोन के लिए बैंकों के पास जाएगी।
13 बैंकों ने किंगफिशर को कर्ज दिया है। इनमें से सबसे ज्यादा पैसा एसबीआई ने दिया है।
इस फोटो में देखिये यह अय्याश क्या कर रहा है , इसके बारे में सारी दुनिया जानती है ....
सरकार अगर इसे पैसे से मदद करेगी तो ham इसका विरोध करेंगे , गरीबो का पैसा ऐसे हम अय्याशी में नहीं जाने देंगे !!
Sunday, November 13, 2011
अन्ना हजारे का कांग्रेस प्रेम
मै कांग्रेस के विरोधी नहीं हैं। अगर कांग्रेस मजबूत लोकपाल बिल लाती है तो मै उसका समर्थन करूँगा : बाबु राव अन्ना हजारे !
अन्ना राजनीती कर रहे है या लोकपाल के बारे में बात कर रहे है ! इनका कहना है की कोर कमिटी में मुस्लिम, दलित, आदिवासी भी रहेंगे ..इसका मतलब क्या है ? आरक्षण की राजनीती !
आज तक इन्होने प्रशांत भूषण, मेधा पाटेकर और संदीप पाण्डेय के बयान के बारे में कुछ भी सफाई नहीं दी ..
केजरीवाल और... किरण बेदी के अहंकार भरे बयान और ओछी हरकते के बारे में भी चुप ही रहते है !
हमेशा सिर्फ धमकी भरे बयान बाजी से देश की जनता को बरगला रहे है !
अब तो ये साफ़ हो गया है की कांग्रेसी अपने चाल में कामयाब हो रहे है और आज अन्ना ने बोल ही दिया है !
कुछ दिन में देश सारी अंधी जनता अन्ना की जयकार करते हुए राहुल विन्ची को नया प्रधान मंत्री बना देगी !
सभी भाइयो से निवेदन है की हमें भी तैयार हो जाना है किसी भी हालत में इस बार कांग्रेस की सरकार नहीं आनी चाहिए !
जय श्री राम !
Saturday, November 12, 2011
सर्व धर्म समान - एक बकवास
सर्व धर्म समान - एक बकवास
by Lovy Bhardwaj on Tuesday, May 31, 2011 at 11:57pm
सर्व धर्म समान - एक बकवास
ब्रिटिश शासन द्वारा गुलाम भारत में सनातन धर्म के प्रति हिन्दुओं की आस्था नष्ट करने के लिए McCauley ने जो शिक्षा प्रणाली प्रारम्भ की थी उसके प्रभाव से आज भी शिक्षित समाज के प्रतिष्ठित लोग सनातन धर्म की महिमा से अनभिज्ञ होने के कारण अपने धर्म का गौरव भूल कर पाश्चात्य काल्पनिक सभ्यता से प्रभावित हो रहे हैं l क्योंकि आज भी भारत के विद्यालयों - विश्विद्यालयों में वही झूठा इतिहास पढ़ाया जा रहा है जो अंग्रेज कूटनीतिज्ञों ने लिखा था, भारत की छद्म स्वतंत्रता मिलने के बाद भी राजनितिक पार्टियों ने अपने अपने वोट बैंक बनाने के उद्देश्य से सब धर्म सामान हैं ... ऐसा प्रचार प्रारम्भ किया l उन सबका उद्देश्य केवल सत्ता प्राप्त करना ही था, उनमे से किसी ने भी सब धर्मो का अध्ययन किया होता तो वो ऐसी बात नहीं कह सकते l
बाजार में मिलने वाले सब उपकरण समान नहीं होते, सब वस्त्र समान नहीं होते,
उनका मूल्य उनके गुण-दोषों के आधार पर भिन्न भिन्न निर्धारति किया जाता है l
सब धातुओं के गहने सामान नहीं होते. सोने की कीमत अलग होती है और अलुमिनियम, चांदी, पीतल लोहे आदि की कीमत अलग होती है l
सब सरकारी नौकर सामान नहीं होते ... चपरासी, क्लर्क, कलेक्टर और मंत्रियों को अलग अलग श्रेणी के नौकर माने जाते हैं l सब राजनितिक पार्टियां सामान हैं ... ऐसा कोई कहे तो .. राजनेता नाराज हो जायेंगे l अपनी पार्टी को श्रेष्ठ और अन्य पार्टियों को कनिष्ठ बताते हैं .... पर धर्म के विषय में सब धर्म सामान कहने में उनको लज्जा नही आती l
वास्तव में जैसे विज्ञान के जगत में किसी एक वैज्ञानिक की बात तब तक सच्ची नहीं मानी जाती जब तक की उसे सम्पूर्ण विश्व के वैज्ञानिक तर्क-संगत और प्रायोगिक स्टार पर सच्ची नहीं मानते l ऐसे ही धर्म के विषय पर भी किसी एक व्यक्ति के कहने से उसकी बात सच्ची नहीं मान सकते l क्योंकि उसमे अपने धर्म के प्रति राग और अन्य धर्मो के प्रति द्वेष होने की सम्भावना है l सनातन धर्म के सिवा अन्य धर्म अपने धर्म को ही सच्चा मानते हैं, दुसरे धर्मो की निंदा करते हैं l केवल सनातन धर्म ही अन्य धर्मों के प्रति उदारता और सहिष्णुता का भाव सिखाता है l इसका अर्थ यह कदापि नहीं हो सकता की सब धर्म समान हैं l
गंगा का जल और ये तालाबों, कुएं या नाली का पानी समान कैसे हो सकता है l
यदि समस्त विश्व के सभी धर्मो को मानने वाले सभी धर्मों का अध्ययन करके तटस्थ अभिप्राय बताने वाले विद्वानों ने किसी धर्म को तर्क संगत और श्रेष्ठ घोषित किया हो तो उसकी महानता को सबको स्वीकार करना पड़ेगा l सम्पूर्ण विश्व में यदि किसी धर्म को ऐसी व्यापक प्रशस्ति प्राप्त हुई है तो वह है ... सनातन धर्म l
जितनी व्यापक प्रशस्ति सनातन धर्म को मिली है उतनी ही व्यापक आलोचना ईसाईयत और इस्लाम की अंतर्राष्ट्रीय विद्वानों और फिलास्फिस्तों ने की है ....
सनातन धर्म की महिमा और सच्चाई को भारत के संत और महापुरुष तो सदियों से सैद्धांतिक और प्रायोगिक प्रमाणों के द्वारा प्रकट करते आये हैं, फिर भी पाश्चात्य विद्वानों से प्रमाणित होने पर ही किसी की बात को स्वीकार करने वाले पाश्चात्य बोद्धिकों के गुलाम ऐसे भारतीय बुद्धिजीवी लोग इस लेख को पढ़कर भी सनातन धर्म की श्रेष्ठता को स्वीअक्र करेंगे तो हमे प्रसन्नता होगी और यदि वो सनातन धर्म के महान ग्रन्थों का अध्ययन करेंगे तो उनको इसकी श्रेष्ठता के अनेक सैद्धांतिक प्रमाण मिलेंगे और किसी अनुभवी पुरुष के मार्गदर्शन में साधना करेंगे तो उनको इसके सत्य के प्रायोगिक प्रमाण भी मिलेंगे l आशा है सनातन धर्मावलम्बी इस लेख को पढने के बाद स्वयम को सनातन धर्मी कहलाने पर गर्व का अनुभव करेंगे l निम्नलिखित विश्व-प्रसिद्ध विद्वानों के वचन सर्व-धर्म सामान कहने वालों के मूंह पर करारे तमाचे मारते हैं और सनातन धर्म की महत्ता प्रतिपादित करते हैं ... जैसे चपरासी, सचिव, कलेक्टर आदि सब अधिकारी समान नहीं होते .. गंगा यमुना गोदावरी कावेरी आदि नदियों का जल .. और कुएं तथा नाली का जल सामान नहीं होता ऐसे ही सब धर्म समान नहीं होते .... सबके प्रति स्नेह सदभाव रखना भारत वर्ष की विशेषता है लेकिन सर्व-धर्म सामान का भाषण करने वाले भोले भले भारत वासियों के दिलो दिमाग में McCauley की कूटनीतिक शिक्षा-निति के और विदेशी गुलामी के संस्कार भरते हैं l सर्वधर्म सामान कह कर अपनी ही संस्कृति का गला घोंटने के अपराध से उन सज्जनों को ये लेख बचाएगा आप स्वयं पढ़ें और औरों तक यह पहुँचाने की पावन सेवा करें l
और बिना पूछे आप इस लेख को SHARE कर सकते हैं ....
1. रोम्या रोलां फ़्रांसिसी विद्वान्
मैंने यूरोप और एशिया के सभी धर्मो का अध्ययन किया है परन्तु मुझे उन सब में सनातन धर्म ही सर्व-श्रेष्ठ दिखाई देता है, मेरा विश्वास है की सनातन धर्म के सामने एक दिन सबको अपना मस्तक झुकाना पड़ेगा l
मानव जाती के अस्तित्व के प्रारम्भ के दिनों से लेकर पृथ्वी पर जहां जिन्दा मनुष्यों के सब स्वप्न साकार हुए हैं तो वह एकमात्र स्थान है ..... भारत l
2 . डाक्टर एनीबेसेंट
मैंने 40 वर्षों तक विश्व के सभी बड़े धर्मो का अध्ययन करके पाया है की सनातन धर्म के समान पूर्ण, महान और वैज्ञानिक धर्म और कोई नहीं है, यदि आप सनातन धर्म छोड़ते हैं तो आप अपनी भारत माता के ह्रदय में छुरा भोंकते हैं l
यदि हिन्दू ही .. सनातन धर्म को न बचा सके तो और कौन बचाएगा ?
यदि भारत की सन्तान अपने धर्म पर दृढ न रही तो कौन सनातन धर्म की रक्षा करेगा ?
यदि हम पक्षपात रहित होकर भली भांति परीक्षा करें तो हमें स्वीकार करना होगा की सारे संसार में साहित्य, धर्म, सभ्य, विज्ञान, आयुर्वेद, चिकित्सा, खगोल, गणित आदि का प्रसार सनातन धर्म ने ही किया
3.विक्टर कोसीण
जब हम पूर्व की और उसमे भी शिरोमणी स्वरूप भारत की साहित्यिक एवं दार्शनिक महान कृतियों का अवलोकन करते हैं तब हमें ऐसे अनेक गंभीर सत्यों का पता चलता है जिनको उन निष्कर्षों से तुलना करने पर की जहां पहुंचकर यूरोपीय प्रतिभा कभी कभी रुक गई है ... हमें पूर्व के आगे घुटने टेक देना पड़ता है l
4. शोपनहार
सम्पूर्ण विश्व में उपनिषदों के समान जीवन को ऊंचा जीवन को ऊंचा उठाने वाला कोई दूसरा अध्ययन का विषय नहीं है l इनसे मेरे जीवन को शांति मिली है इन्हीं से मुझे मृत्यु में भी शांति मिलेगी l
शोपनहार के इन वचनों पर मेक्समूलर ने कहा की "शोपनहार के इन शब्दों के लिए किसी समर्थन की आवश्यकता हो तो अपने जीवनभर के अध्ययन के आधार पर मैं प्रसन्नतापूर्वक उनका समर्थन करूँगा"
यहाँ यह भी उल्लेखनीय है की ये वही मेक्समूलर है जिसको अंग्रेजों द्वारा प्रतिमाह 1 लाख रूपये वेतन दिया जाता था सनातन धर्म के ग्रन्थों को दूषित करने के लिए .... और उनमे जातिवाद, छुआछूत आदि जैसी मनगढ़ंत बातें योजनाबद्ध रूप से भारी गईं ... आज के समय में ज्यादातर लोग मेक्समूलर के ही दूषित ग्रन्थों को पढ़ कर जातिवाद और छुआछूत के षड्यंत्रों से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं l मनु स्मृति को सबसे ज्यादा मेक्समूलर ने ही दूषित किया l
5. फ्रेडरिक स्लेगल
उपनिषदों में वर्णित पूर्वीय आदर्शवाद के प्रचुर प्रकाशपूंज की तुलना में यूरोपवासियों का उच्छ्तम तत्वज्ञान ऐसा ही लगता है, ऐसा लगता है जैसे मध्यांत सूर्य के व्योम प्याली प्रताप की पूर्ण प्रखरता में टिमटिमाती हुई अनलशिखा की कोई चिंगारी जिसकी अस्थिर और निस्तेज ज्योति ऐसी हो रही हो मनो अब बूढी की तब बुझी l
6. पाल डायसन
उपनिषदों की दार्शनिक धाराएं न केवल भारत में अपितु सम्पूर्ण विश्व में अतुलनीय है l
7. मोनियर विलियम्स
यूरोप के प्रथम दार्शनिक प्लेटो और पाइथागोरस दोनों ने दर्शनशास्त्र का ज्ञान भारतीय गुरुओं से प्राप्त किया l
8. प्रसिद्ध इतिहासकार लेयब्रिज
पाश्चात्य दर्शनशास्त्र के आदिगुरू आर्य महर्षि हैं, इसमें संदेश नहीं है l
9. थोरो
प्राचीन युग की सभी स्मरणीय वस्तुओं में भगवदगीता से श्रेष्ठ कोई भी वस्तु नहीं है l गीता के साथ तुलना करने पर जगत का आधुनिक समस्त ज्ञान मुझे तुच्छ लगता है l मैं नित्य प्रातः काल अपने ह्रदय और बुद्धि को गीतारूपी पवित्र जल में स्नान कराता हूँ l
10. डाक्टर मेकनिकल
भारत वर्ष में गीता बुद्धि की प्रखरता, आचार की उत्कृष्टता एवं धार्मिक उत्साह का एक अपूर्व मिश्रण उपस्थित करती है l
11. के. ब्राउनिंग
गीता का उपदेश इतना अलौकिक पुण्य और ऐसा विलक्षण है की जीवन पथ पर चलते चलते अनेक निराश और श्रांत पथिकों को इसने शांति, आशा और आश्वासन दिया है और उन्हें सदा के लिए चूर चूर होकर मिट जाने से बचा लिया है, जैसे इसने अर्जुन को बचाया l
12. रेवरंड आर्थर
जगदगुरु श्रीकृष्ण ने भगवदगीता के रूप में जगत को एक अति उत्तम दें दी है l ज्ञान, भक्ति, कर्म ये शाश्वत आदर्श एज दुसरे को साथ लिए हुए चलते हैं, इनमे से प्रत्येक अन्य दोनों के लिए आवश्यक है l
13. वीलडुरान्त
भारत हमारी जाती की मातृभूमि है और संस्कृत यूरोप की भाषाओँ की माता (जननी) है और वह हमारी फिलोसोफी की भी माता है l
अरबों के द्वारा (अरब के निवासियों के द्वारा ) भारत से हमारा गणित शास्त्र आयात किया गया है l
इसाई धर्म के मूर्तिमत आदर्श मूलतः बुद्ध के द्वारा मिले हैं इस अर्थ में भी भारत हमारी माता है l
गाँव के लोगों द्वारा स्वराज्य और प्रजातंत्र (लोकतंत्र) की जननी भारत है l
कई प्रकार से भारत हमारी सबकी माता है l
ईसाईयत विषयक
1. इतिहासकार चितरिस सोरोकीं
पिछली कुछ शताब्दियों में सबसे अधिक आक्रामक, लड़ाकू, लालची, सत्ता लोलुप और सत्ता के मद में चूर यदि मानव समाज में कोई अंग हैं तो वो हैं पाश्चात्य ईसाई मिशनरियां l
इन सैकड़ों वर्षों में पाश्चात्य ईसाई देशों ने सब महाद्वीपों और व्यापारियों ने अधिकतर अन्य धर्मोव्ल्म्बी देशों को अपना गुलाम बना कर लूटा l
अमेरिका, आस्ट्रेलिया, एशिया. अफ्रीका आदि के करोड़ों भोले आदिवासियों को इस विचित्र ब्रांड ईसाई मानवप्रेम के अधीन बनाकर उनका अत्यंत निर्दयता से खत्म किया गया, उनकी संस्कृति, चरित्र, जीवनपद्धती, जीवन मूल्यों और संस्थाएं नष्ट भ्रष्ट कर दी गयीं ताकि उन्हें ईसाई बनाया जा सके l
2. फिलोसोफर नित्शे
मैं ईसाई धर्म को एक अभिशाप मानता हूँ, उसमे आंतरिक विकृति की पराकाष्ठ है l
ईसाईयत गुलाम, फरयाद और चंडाल का पंथ है, ईसाईयत द्वेषभाव से भरपूर वृत्ति है l
इस भयंकर विष का कोई मारण है तो वो केवल सनातन धर्म ही हो सकता है l
इसीलिए ईसाईयत ने सनातन धर्म की शिक्षा-पद्धती और जीवनशैली को नष्ट करके ईसाईयत आधारित शिक्षा पद्धति और जीवनशैली को प्रारम्भ किया और जिसके फलस्वरूप गुरुकुलों, गौ-शालाओं, सांस्कृतिक संस्थाओं, सभ्यताओं, मान्यताओं का दूषित करके उन्हें विकृत करके दिखाया गया और नष्ट किया गया l
ईसाई यह भली-भाँती जानते हैं की यदि भारत के लोग अपने अध्यात्म और संस्कृति से दोबारा जुड़ गए तो विश्व में ईसाईयत को कोई नहीं पूछेगा l
3. टोलस्टोय
विश्व के किसी भी धर्म ने इतनी वाहियात अवैज्ञानिक, आपस में विरोधी और अनैतिक बातों का उपदेश नहीं दिया, जितना चर्चों ने दिया है l
4. ज्यार्ज बर्नार्ड शा
बाइबल पुराने और दकियानूसी अंध-विश्वासों का एक बंडल है l
5. एच. जी. वेल्स
दुनिया की सबसे बड़ी बुराई है रोमन कैथोलिक चर्च
6. पंडित श्री राम शर्मा आचार्य
भारत में पादरियों का धर्म प्रचार सनातन धर्म को मिटाने का खुला षड्यंत्र है जो की एक लंबे अरसे से चला आ रहा है l हिन्दुओं का यह धार्मिक कर्तव्य है की वे ईसाईयों के षड्यंत्र से आत्मरक्षा में अपना तन,मन,धन लगा कर और आज के हिन्दुओं को लपेटती हुई ईसाईयत की लापत परोक्ष रूप से उनकी और बढ़ रही है उसे वहीं बुझा दे l
ऐसा करने से ही भारत में धर्म-निरपेक्षता, धार्मिक-बंधुत्व तथा सच्चे लोकतंत्र की रक्षा हो सकेगी अन्यथा पुनः आजादी को खतरे की संभावना हो सकती है l
7. महात्मा गांधी
हमें गौ-मांस भक्षण और शराब पीने वाला ईसाई धर्म नहीं चाहिए, धर्म परिवर्तन वो जहर है जो सत्य और व्यक्ति की जड़ों को खोखला कर देता है l
मिशनरियों के प्रभाव से हिन्दू परिवार का विदेशी भाषा, वेशभूषा, रीतिरिवाज के द्वारा विघटन हुआ है l
यदि मुझे कानून बनाने का अधिकार होता तो मैं धर्म परिवर्तन बंद करवा देता इसे तो मिशनरियों ने एक व्यापार बना लिया है l
परधर्म आत्मा की उन्नति का विषय है इसे रोटी, कपड़ा या दवाइयों के बदले में बेचा या बदला नहीं जा सकता l
8. स्वामी विवेकानन्द जी
हिन्दू समाज में से एक व्यक्ति मुस्लियम या ईसाई बने इसका मतलब यह नहीं की एक हिन्दू कम हुआ, किन्तु हिन्दू समाज का एक दुश्मन बढ़ा l
विश्व के महान धर्मो में हिन्दू धर्म के समान और कोई सर्वग्राही और वैविहय्पूर्ण धर्म नहीं है
अन्य इतिहासकार तथा फोलोसोफर
उजल्यु क्रुक
कन्फेशन्स से लेकर अंतिम रचना तक ऐसी एक भी टोलस्टोय की साहित्यिक रचना नहीं है जो हिन्दू विचार से प्रेरणा लेकर न लिखी गई हो l
मार्कोवीच
बीज-गणित, ज्यामितीय और आकाश विज्ञान में उनके उपयोग करने की खोज सनातन धर्म ने ही की है l
सर मैनर विलियम
भारत की आध्यात्मिकता समस्त विश्व में सबसे अधिक बहु-आयामी है इस बात में संदेह नहीं l
ज्यार्ज फ्युरेसटीन
उपनिषदों का संदेश किसी देशातीत और कालातीत स्थान से आता है l मौन से उसकी वाणी प्रकट हुई है उसका उद्देश्य मनुष्य को अपने मूल स्वरूप में जगाना है l
बेनेडिफ़टीन फाघर
समारे सम्पूर्ण शुभ गुणों का आधार ईश्वर ऐसा नहीं है जैसा OLD TESTAMENT में बताया है है की वह हमारा विरोधी और हमसे अलग है लेकिन वह अपनी दिव्य आत्मा है l
यह बात आयर एनी बहुत सी बातें हम उपनिषदों से सीखते हैं l ईसाई चेतना को अंतिम रूप देने के लिए हमे यह पाठ पढ़ना होगा तभी वह सब इस और स सुसंगत और पूर्ण होगी l
पोल ड्यूसन
भारत ने विश्व को एक ऐसा धर्म दिया है जो सबसे प्राचीन है और तर्कसंगत भी है l भारत के विषय में वर्णन करते हुए वोल्टेयर ने लिखा है की विश्व के सभी देशों को भारत का आश्रय लेना पड़ता था l जबकि भारत को किसी भी देश का आश्रय नहीं लेना पड़ा, उसने एशिया के महान सम्राट फ्रोड्रिक को आश्वस्त किया की "हमारा पवित्र ईसाई धर्म केवल ब्रह्म के प्राचीन सनातन धर्म पर आधारित है l"
रामस्वरूप
धर्म के क्षेत्र में सब राष्ट्र दरिद्र हैं, लेकिन भारत इस क्षेत्र में अरबोंपति है l
मार्क ट्वेइन (अमेरिकन विद्वान्)
इस्लाम और ईसाईयत एक ही सिक्के के दो पहलु हैं, सनातन धर्म की शिक्षाओं के बाद किसी और धर्म की आवश्यकता नहीं पड़ती l
मेरी समझ में यह नहीं आता की क्यों ईसाईयत और इस्लाम को प्रारम्भ किया गया जबकि सबसे परिपूर्ण, वैज्ञानिक, प्रायोगिक सनातन धर्म अस्तित्व में तब भी था और आज भी है l
संपत भूपालम
जैसे कोई इजीप्ट या बेबिलोनिया या असीरिया के इतिहास का समापन कर सकता है ऐसे भारत के इतिहास का समापन नहीं कर सकता क्योंकि यह इतिहास अब भी बनाया जा रहा है l
यह संस्कृति अभी भी सृजनशील है l
वील ड्यूश
जब जब भी मैं वेदों के किसी भाग का पठान किया है तब मुझे अलौकिक और दिव्य प्रकाश ने आलोकित किया है l
वेदों के महान उपदेशों में साम्प्रदायिकता की गंध भी नहीं है l
यह महान सनातन धर्म सर्व-युगों के लिए, स्थानों के लिए और राष्ट्रों के लिए महान ज्ञान प्राप्ति का राजमार्ग है l
हेनरी डेविड
सब प्राणियों के श्रीदे में बसने वाले सर्व-व्यापक ईश्वर का उपदेश देने की अद्भुत सूक्ष्मता के कारण ही वास्तव में हिन्दू धर्म से अत्यंत प्रभावित हुआ हूँ l
सर विलियम्स जोन्स
जब हम वेदान्त और उस पर आधारित सुन्दर सत्साहित्य को पढ़ते हैं तब यह माने बिना नहीं रह सकते की पायथागोरस और प्लेटो ने उनके सूक्ष्म सिद्धांत भारतीय ऋषियों के मूल स्रोत से ही प्रान्त किये हैं l
यह है वास्तविकता ईसाई मिशनरियों द्वारा संचालित कान्वेंट स्कूलों की
गुजरात के प्रसिद्ध दैनिक गुजरात समाचार में छपी खबर के अनुसार अहमदाबाद के ओढव विस्तार के ईसाई मिशनरी संचालित होसन्ना मिशनरी स्कूल के संचालकों ने माला पहनने पर, तिलक लगाने पर, कंगन पहनने पर, पायल पहनने पर, एवं राष्ट्रगीत गाने पर प्रतिबन्ध लगाया है l
कुछ ख़ास वस्त्र पहनकर आने का सख्त आदेश दिया है, क्योंकि वे जानते हैं की इन चीजों के रहते हिन्दू बालकों में सनातन धर्म के संस्कार बने रहेंगे और उनको धर्मान्तरण कराने में मुश्किल होगी l इससे ऐसे गैर-कानूनी आदेशों का उल्लंघन करने वाले पर विद्यार्थियों को सख्त सजा देकर उनकी पिटाई की जाती है l
हाल ही में एक छात्र सलवार एवं पायल पहनकर तथा तिलक लगाकर स्कूल में आई तो शिक्षिका ने उसे लकड़ी से मारा l
इस दुष्कृत्य का दूसरी शिक्षिका ने विरोध किया तो उस शिक्षिका को पाठशाला से तुरंत ही निकाल दिया गया l
हालांकि ऐसी अन्यायपूर्ण नीति का विरोध करने के लिए सैकड़ों विद्यार्थी एवं उनके माता-पिता एकत्रित हो गए एवं संचालकों के विरोध में नारे लगाने लगे l इसके बाद पुलिस एवं गुजरात शिक्षाधिकारी के कार्यकाल में भी संचालकों के विरोध में शिकायत दर्ज करवाई l
स्पष्ट देखा जाता है की मिशनरियों द्वारा शिक्षा की आड़ में बालकों में हिन्दू संस्कृति के विरोधी कु-संस्कारों का सींचन करके उनका धर्मान्तरण करवाने का षड्यंत्र हमारे देश में तीव्र गति से बढ़ रहा है l माता पिता सोचते हैं की हमारे बच्चे मिशनरी स्कूलों में पढ़ कर जीवन में ज्यादा आगे बढ़ेंगे लेकिन उनको यह पता नहीं की धर्मान्तरण के अड्डे बन चुकी ये कु-पाठशालाएं बालकों के मस्तिष्क में सनातन संस्कृति, उनके रीति रिवाज़ एवं देवी-देवताओं के विरोध में मनगढ़ंत बातें भर कर उनको गुमराह करके ईसाई धर्म अपनाने के लिए प्रेरित कर रही है l
और इस कु-पष्ठ्शालाओं में पढ़ कर ज्यादातर बच्चे इतना आगे बढ़ जाते हैं की एक दिन नैतिकता में गिर ही जाते हैं अपने माता पिता को भी छोड़ दते हैं l
क्या हम अपने ही देश में पराये होना चाहते हैं ??
क्या हम फिर से गुलामी की जंजीरों में जकड़ना चाहते हैं ?
यदि नहीं तो आइये मिशनरियों के ऐसे षड्यंत्रों का सख्त विरोध करें एवं अपने बच्चों को ऐसे मिशनरी संचालित कु-पाठशालाओं में पढने भेज कर उनके भविष्य को अन्धकार में न डालें, और देश की स्वतंत्रता को खतरे में न देलीं l
धर्म परिवर्तन के ऐसे षड्यंत्रों से स्वयं सावधान रहें और सम्पर्क में आने वालों को भी सावधान करें l
जय श्री राम
जय भारत जय हो
by Lovy Bhardwaj on Tuesday, May 31, 2011 at 11:57pm
सर्व धर्म समान - एक बकवास
ब्रिटिश शासन द्वारा गुलाम भारत में सनातन धर्म के प्रति हिन्दुओं की आस्था नष्ट करने के लिए McCauley ने जो शिक्षा प्रणाली प्रारम्भ की थी उसके प्रभाव से आज भी शिक्षित समाज के प्रतिष्ठित लोग सनातन धर्म की महिमा से अनभिज्ञ होने के कारण अपने धर्म का गौरव भूल कर पाश्चात्य काल्पनिक सभ्यता से प्रभावित हो रहे हैं l क्योंकि आज भी भारत के विद्यालयों - विश्विद्यालयों में वही झूठा इतिहास पढ़ाया जा रहा है जो अंग्रेज कूटनीतिज्ञों ने लिखा था, भारत की छद्म स्वतंत्रता मिलने के बाद भी राजनितिक पार्टियों ने अपने अपने वोट बैंक बनाने के उद्देश्य से सब धर्म सामान हैं ... ऐसा प्रचार प्रारम्भ किया l उन सबका उद्देश्य केवल सत्ता प्राप्त करना ही था, उनमे से किसी ने भी सब धर्मो का अध्ययन किया होता तो वो ऐसी बात नहीं कह सकते l
बाजार में मिलने वाले सब उपकरण समान नहीं होते, सब वस्त्र समान नहीं होते,
उनका मूल्य उनके गुण-दोषों के आधार पर भिन्न भिन्न निर्धारति किया जाता है l
सब धातुओं के गहने सामान नहीं होते. सोने की कीमत अलग होती है और अलुमिनियम, चांदी, पीतल लोहे आदि की कीमत अलग होती है l
सब सरकारी नौकर सामान नहीं होते ... चपरासी, क्लर्क, कलेक्टर और मंत्रियों को अलग अलग श्रेणी के नौकर माने जाते हैं l सब राजनितिक पार्टियां सामान हैं ... ऐसा कोई कहे तो .. राजनेता नाराज हो जायेंगे l अपनी पार्टी को श्रेष्ठ और अन्य पार्टियों को कनिष्ठ बताते हैं .... पर धर्म के विषय में सब धर्म सामान कहने में उनको लज्जा नही आती l
वास्तव में जैसे विज्ञान के जगत में किसी एक वैज्ञानिक की बात तब तक सच्ची नहीं मानी जाती जब तक की उसे सम्पूर्ण विश्व के वैज्ञानिक तर्क-संगत और प्रायोगिक स्टार पर सच्ची नहीं मानते l ऐसे ही धर्म के विषय पर भी किसी एक व्यक्ति के कहने से उसकी बात सच्ची नहीं मान सकते l क्योंकि उसमे अपने धर्म के प्रति राग और अन्य धर्मो के प्रति द्वेष होने की सम्भावना है l सनातन धर्म के सिवा अन्य धर्म अपने धर्म को ही सच्चा मानते हैं, दुसरे धर्मो की निंदा करते हैं l केवल सनातन धर्म ही अन्य धर्मों के प्रति उदारता और सहिष्णुता का भाव सिखाता है l इसका अर्थ यह कदापि नहीं हो सकता की सब धर्म समान हैं l
गंगा का जल और ये तालाबों, कुएं या नाली का पानी समान कैसे हो सकता है l
यदि समस्त विश्व के सभी धर्मो को मानने वाले सभी धर्मों का अध्ययन करके तटस्थ अभिप्राय बताने वाले विद्वानों ने किसी धर्म को तर्क संगत और श्रेष्ठ घोषित किया हो तो उसकी महानता को सबको स्वीकार करना पड़ेगा l सम्पूर्ण विश्व में यदि किसी धर्म को ऐसी व्यापक प्रशस्ति प्राप्त हुई है तो वह है ... सनातन धर्म l
जितनी व्यापक प्रशस्ति सनातन धर्म को मिली है उतनी ही व्यापक आलोचना ईसाईयत और इस्लाम की अंतर्राष्ट्रीय विद्वानों और फिलास्फिस्तों ने की है ....
सनातन धर्म की महिमा और सच्चाई को भारत के संत और महापुरुष तो सदियों से सैद्धांतिक और प्रायोगिक प्रमाणों के द्वारा प्रकट करते आये हैं, फिर भी पाश्चात्य विद्वानों से प्रमाणित होने पर ही किसी की बात को स्वीकार करने वाले पाश्चात्य बोद्धिकों के गुलाम ऐसे भारतीय बुद्धिजीवी लोग इस लेख को पढ़कर भी सनातन धर्म की श्रेष्ठता को स्वीअक्र करेंगे तो हमे प्रसन्नता होगी और यदि वो सनातन धर्म के महान ग्रन्थों का अध्ययन करेंगे तो उनको इसकी श्रेष्ठता के अनेक सैद्धांतिक प्रमाण मिलेंगे और किसी अनुभवी पुरुष के मार्गदर्शन में साधना करेंगे तो उनको इसके सत्य के प्रायोगिक प्रमाण भी मिलेंगे l आशा है सनातन धर्मावलम्बी इस लेख को पढने के बाद स्वयम को सनातन धर्मी कहलाने पर गर्व का अनुभव करेंगे l निम्नलिखित विश्व-प्रसिद्ध विद्वानों के वचन सर्व-धर्म सामान कहने वालों के मूंह पर करारे तमाचे मारते हैं और सनातन धर्म की महत्ता प्रतिपादित करते हैं ... जैसे चपरासी, सचिव, कलेक्टर आदि सब अधिकारी समान नहीं होते .. गंगा यमुना गोदावरी कावेरी आदि नदियों का जल .. और कुएं तथा नाली का जल सामान नहीं होता ऐसे ही सब धर्म समान नहीं होते .... सबके प्रति स्नेह सदभाव रखना भारत वर्ष की विशेषता है लेकिन सर्व-धर्म सामान का भाषण करने वाले भोले भले भारत वासियों के दिलो दिमाग में McCauley की कूटनीतिक शिक्षा-निति के और विदेशी गुलामी के संस्कार भरते हैं l सर्वधर्म सामान कह कर अपनी ही संस्कृति का गला घोंटने के अपराध से उन सज्जनों को ये लेख बचाएगा आप स्वयं पढ़ें और औरों तक यह पहुँचाने की पावन सेवा करें l
और बिना पूछे आप इस लेख को SHARE कर सकते हैं ....
1. रोम्या रोलां फ़्रांसिसी विद्वान्
मैंने यूरोप और एशिया के सभी धर्मो का अध्ययन किया है परन्तु मुझे उन सब में सनातन धर्म ही सर्व-श्रेष्ठ दिखाई देता है, मेरा विश्वास है की सनातन धर्म के सामने एक दिन सबको अपना मस्तक झुकाना पड़ेगा l
मानव जाती के अस्तित्व के प्रारम्भ के दिनों से लेकर पृथ्वी पर जहां जिन्दा मनुष्यों के सब स्वप्न साकार हुए हैं तो वह एकमात्र स्थान है ..... भारत l
2 . डाक्टर एनीबेसेंट
मैंने 40 वर्षों तक विश्व के सभी बड़े धर्मो का अध्ययन करके पाया है की सनातन धर्म के समान पूर्ण, महान और वैज्ञानिक धर्म और कोई नहीं है, यदि आप सनातन धर्म छोड़ते हैं तो आप अपनी भारत माता के ह्रदय में छुरा भोंकते हैं l
यदि हिन्दू ही .. सनातन धर्म को न बचा सके तो और कौन बचाएगा ?
यदि भारत की सन्तान अपने धर्म पर दृढ न रही तो कौन सनातन धर्म की रक्षा करेगा ?
यदि हम पक्षपात रहित होकर भली भांति परीक्षा करें तो हमें स्वीकार करना होगा की सारे संसार में साहित्य, धर्म, सभ्य, विज्ञान, आयुर्वेद, चिकित्सा, खगोल, गणित आदि का प्रसार सनातन धर्म ने ही किया
3.विक्टर कोसीण
जब हम पूर्व की और उसमे भी शिरोमणी स्वरूप भारत की साहित्यिक एवं दार्शनिक महान कृतियों का अवलोकन करते हैं तब हमें ऐसे अनेक गंभीर सत्यों का पता चलता है जिनको उन निष्कर्षों से तुलना करने पर की जहां पहुंचकर यूरोपीय प्रतिभा कभी कभी रुक गई है ... हमें पूर्व के आगे घुटने टेक देना पड़ता है l
4. शोपनहार
सम्पूर्ण विश्व में उपनिषदों के समान जीवन को ऊंचा जीवन को ऊंचा उठाने वाला कोई दूसरा अध्ययन का विषय नहीं है l इनसे मेरे जीवन को शांति मिली है इन्हीं से मुझे मृत्यु में भी शांति मिलेगी l
शोपनहार के इन वचनों पर मेक्समूलर ने कहा की "शोपनहार के इन शब्दों के लिए किसी समर्थन की आवश्यकता हो तो अपने जीवनभर के अध्ययन के आधार पर मैं प्रसन्नतापूर्वक उनका समर्थन करूँगा"
यहाँ यह भी उल्लेखनीय है की ये वही मेक्समूलर है जिसको अंग्रेजों द्वारा प्रतिमाह 1 लाख रूपये वेतन दिया जाता था सनातन धर्म के ग्रन्थों को दूषित करने के लिए .... और उनमे जातिवाद, छुआछूत आदि जैसी मनगढ़ंत बातें योजनाबद्ध रूप से भारी गईं ... आज के समय में ज्यादातर लोग मेक्समूलर के ही दूषित ग्रन्थों को पढ़ कर जातिवाद और छुआछूत के षड्यंत्रों से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं l मनु स्मृति को सबसे ज्यादा मेक्समूलर ने ही दूषित किया l
5. फ्रेडरिक स्लेगल
उपनिषदों में वर्णित पूर्वीय आदर्शवाद के प्रचुर प्रकाशपूंज की तुलना में यूरोपवासियों का उच्छ्तम तत्वज्ञान ऐसा ही लगता है, ऐसा लगता है जैसे मध्यांत सूर्य के व्योम प्याली प्रताप की पूर्ण प्रखरता में टिमटिमाती हुई अनलशिखा की कोई चिंगारी जिसकी अस्थिर और निस्तेज ज्योति ऐसी हो रही हो मनो अब बूढी की तब बुझी l
6. पाल डायसन
उपनिषदों की दार्शनिक धाराएं न केवल भारत में अपितु सम्पूर्ण विश्व में अतुलनीय है l
7. मोनियर विलियम्स
यूरोप के प्रथम दार्शनिक प्लेटो और पाइथागोरस दोनों ने दर्शनशास्त्र का ज्ञान भारतीय गुरुओं से प्राप्त किया l
8. प्रसिद्ध इतिहासकार लेयब्रिज
पाश्चात्य दर्शनशास्त्र के आदिगुरू आर्य महर्षि हैं, इसमें संदेश नहीं है l
9. थोरो
प्राचीन युग की सभी स्मरणीय वस्तुओं में भगवदगीता से श्रेष्ठ कोई भी वस्तु नहीं है l गीता के साथ तुलना करने पर जगत का आधुनिक समस्त ज्ञान मुझे तुच्छ लगता है l मैं नित्य प्रातः काल अपने ह्रदय और बुद्धि को गीतारूपी पवित्र जल में स्नान कराता हूँ l
10. डाक्टर मेकनिकल
भारत वर्ष में गीता बुद्धि की प्रखरता, आचार की उत्कृष्टता एवं धार्मिक उत्साह का एक अपूर्व मिश्रण उपस्थित करती है l
11. के. ब्राउनिंग
गीता का उपदेश इतना अलौकिक पुण्य और ऐसा विलक्षण है की जीवन पथ पर चलते चलते अनेक निराश और श्रांत पथिकों को इसने शांति, आशा और आश्वासन दिया है और उन्हें सदा के लिए चूर चूर होकर मिट जाने से बचा लिया है, जैसे इसने अर्जुन को बचाया l
12. रेवरंड आर्थर
जगदगुरु श्रीकृष्ण ने भगवदगीता के रूप में जगत को एक अति उत्तम दें दी है l ज्ञान, भक्ति, कर्म ये शाश्वत आदर्श एज दुसरे को साथ लिए हुए चलते हैं, इनमे से प्रत्येक अन्य दोनों के लिए आवश्यक है l
13. वीलडुरान्त
भारत हमारी जाती की मातृभूमि है और संस्कृत यूरोप की भाषाओँ की माता (जननी) है और वह हमारी फिलोसोफी की भी माता है l
अरबों के द्वारा (अरब के निवासियों के द्वारा ) भारत से हमारा गणित शास्त्र आयात किया गया है l
इसाई धर्म के मूर्तिमत आदर्श मूलतः बुद्ध के द्वारा मिले हैं इस अर्थ में भी भारत हमारी माता है l
गाँव के लोगों द्वारा स्वराज्य और प्रजातंत्र (लोकतंत्र) की जननी भारत है l
कई प्रकार से भारत हमारी सबकी माता है l
ईसाईयत विषयक
1. इतिहासकार चितरिस सोरोकीं
पिछली कुछ शताब्दियों में सबसे अधिक आक्रामक, लड़ाकू, लालची, सत्ता लोलुप और सत्ता के मद में चूर यदि मानव समाज में कोई अंग हैं तो वो हैं पाश्चात्य ईसाई मिशनरियां l
इन सैकड़ों वर्षों में पाश्चात्य ईसाई देशों ने सब महाद्वीपों और व्यापारियों ने अधिकतर अन्य धर्मोव्ल्म्बी देशों को अपना गुलाम बना कर लूटा l
अमेरिका, आस्ट्रेलिया, एशिया. अफ्रीका आदि के करोड़ों भोले आदिवासियों को इस विचित्र ब्रांड ईसाई मानवप्रेम के अधीन बनाकर उनका अत्यंत निर्दयता से खत्म किया गया, उनकी संस्कृति, चरित्र, जीवनपद्धती, जीवन मूल्यों और संस्थाएं नष्ट भ्रष्ट कर दी गयीं ताकि उन्हें ईसाई बनाया जा सके l
2. फिलोसोफर नित्शे
मैं ईसाई धर्म को एक अभिशाप मानता हूँ, उसमे आंतरिक विकृति की पराकाष्ठ है l
ईसाईयत गुलाम, फरयाद और चंडाल का पंथ है, ईसाईयत द्वेषभाव से भरपूर वृत्ति है l
इस भयंकर विष का कोई मारण है तो वो केवल सनातन धर्म ही हो सकता है l
इसीलिए ईसाईयत ने सनातन धर्म की शिक्षा-पद्धती और जीवनशैली को नष्ट करके ईसाईयत आधारित शिक्षा पद्धति और जीवनशैली को प्रारम्भ किया और जिसके फलस्वरूप गुरुकुलों, गौ-शालाओं, सांस्कृतिक संस्थाओं, सभ्यताओं, मान्यताओं का दूषित करके उन्हें विकृत करके दिखाया गया और नष्ट किया गया l
ईसाई यह भली-भाँती जानते हैं की यदि भारत के लोग अपने अध्यात्म और संस्कृति से दोबारा जुड़ गए तो विश्व में ईसाईयत को कोई नहीं पूछेगा l
3. टोलस्टोय
विश्व के किसी भी धर्म ने इतनी वाहियात अवैज्ञानिक, आपस में विरोधी और अनैतिक बातों का उपदेश नहीं दिया, जितना चर्चों ने दिया है l
4. ज्यार्ज बर्नार्ड शा
बाइबल पुराने और दकियानूसी अंध-विश्वासों का एक बंडल है l
5. एच. जी. वेल्स
दुनिया की सबसे बड़ी बुराई है रोमन कैथोलिक चर्च
6. पंडित श्री राम शर्मा आचार्य
भारत में पादरियों का धर्म प्रचार सनातन धर्म को मिटाने का खुला षड्यंत्र है जो की एक लंबे अरसे से चला आ रहा है l हिन्दुओं का यह धार्मिक कर्तव्य है की वे ईसाईयों के षड्यंत्र से आत्मरक्षा में अपना तन,मन,धन लगा कर और आज के हिन्दुओं को लपेटती हुई ईसाईयत की लापत परोक्ष रूप से उनकी और बढ़ रही है उसे वहीं बुझा दे l
ऐसा करने से ही भारत में धर्म-निरपेक्षता, धार्मिक-बंधुत्व तथा सच्चे लोकतंत्र की रक्षा हो सकेगी अन्यथा पुनः आजादी को खतरे की संभावना हो सकती है l
7. महात्मा गांधी
हमें गौ-मांस भक्षण और शराब पीने वाला ईसाई धर्म नहीं चाहिए, धर्म परिवर्तन वो जहर है जो सत्य और व्यक्ति की जड़ों को खोखला कर देता है l
मिशनरियों के प्रभाव से हिन्दू परिवार का विदेशी भाषा, वेशभूषा, रीतिरिवाज के द्वारा विघटन हुआ है l
यदि मुझे कानून बनाने का अधिकार होता तो मैं धर्म परिवर्तन बंद करवा देता इसे तो मिशनरियों ने एक व्यापार बना लिया है l
परधर्म आत्मा की उन्नति का विषय है इसे रोटी, कपड़ा या दवाइयों के बदले में बेचा या बदला नहीं जा सकता l
8. स्वामी विवेकानन्द जी
हिन्दू समाज में से एक व्यक्ति मुस्लियम या ईसाई बने इसका मतलब यह नहीं की एक हिन्दू कम हुआ, किन्तु हिन्दू समाज का एक दुश्मन बढ़ा l
विश्व के महान धर्मो में हिन्दू धर्म के समान और कोई सर्वग्राही और वैविहय्पूर्ण धर्म नहीं है
अन्य इतिहासकार तथा फोलोसोफर
उजल्यु क्रुक
कन्फेशन्स से लेकर अंतिम रचना तक ऐसी एक भी टोलस्टोय की साहित्यिक रचना नहीं है जो हिन्दू विचार से प्रेरणा लेकर न लिखी गई हो l
मार्कोवीच
बीज-गणित, ज्यामितीय और आकाश विज्ञान में उनके उपयोग करने की खोज सनातन धर्म ने ही की है l
सर मैनर विलियम
भारत की आध्यात्मिकता समस्त विश्व में सबसे अधिक बहु-आयामी है इस बात में संदेह नहीं l
ज्यार्ज फ्युरेसटीन
उपनिषदों का संदेश किसी देशातीत और कालातीत स्थान से आता है l मौन से उसकी वाणी प्रकट हुई है उसका उद्देश्य मनुष्य को अपने मूल स्वरूप में जगाना है l
बेनेडिफ़टीन फाघर
समारे सम्पूर्ण शुभ गुणों का आधार ईश्वर ऐसा नहीं है जैसा OLD TESTAMENT में बताया है है की वह हमारा विरोधी और हमसे अलग है लेकिन वह अपनी दिव्य आत्मा है l
यह बात आयर एनी बहुत सी बातें हम उपनिषदों से सीखते हैं l ईसाई चेतना को अंतिम रूप देने के लिए हमे यह पाठ पढ़ना होगा तभी वह सब इस और स सुसंगत और पूर्ण होगी l
पोल ड्यूसन
भारत ने विश्व को एक ऐसा धर्म दिया है जो सबसे प्राचीन है और तर्कसंगत भी है l भारत के विषय में वर्णन करते हुए वोल्टेयर ने लिखा है की विश्व के सभी देशों को भारत का आश्रय लेना पड़ता था l जबकि भारत को किसी भी देश का आश्रय नहीं लेना पड़ा, उसने एशिया के महान सम्राट फ्रोड्रिक को आश्वस्त किया की "हमारा पवित्र ईसाई धर्म केवल ब्रह्म के प्राचीन सनातन धर्म पर आधारित है l"
रामस्वरूप
धर्म के क्षेत्र में सब राष्ट्र दरिद्र हैं, लेकिन भारत इस क्षेत्र में अरबोंपति है l
मार्क ट्वेइन (अमेरिकन विद्वान्)
इस्लाम और ईसाईयत एक ही सिक्के के दो पहलु हैं, सनातन धर्म की शिक्षाओं के बाद किसी और धर्म की आवश्यकता नहीं पड़ती l
मेरी समझ में यह नहीं आता की क्यों ईसाईयत और इस्लाम को प्रारम्भ किया गया जबकि सबसे परिपूर्ण, वैज्ञानिक, प्रायोगिक सनातन धर्म अस्तित्व में तब भी था और आज भी है l
संपत भूपालम
जैसे कोई इजीप्ट या बेबिलोनिया या असीरिया के इतिहास का समापन कर सकता है ऐसे भारत के इतिहास का समापन नहीं कर सकता क्योंकि यह इतिहास अब भी बनाया जा रहा है l
यह संस्कृति अभी भी सृजनशील है l
वील ड्यूश
जब जब भी मैं वेदों के किसी भाग का पठान किया है तब मुझे अलौकिक और दिव्य प्रकाश ने आलोकित किया है l
वेदों के महान उपदेशों में साम्प्रदायिकता की गंध भी नहीं है l
यह महान सनातन धर्म सर्व-युगों के लिए, स्थानों के लिए और राष्ट्रों के लिए महान ज्ञान प्राप्ति का राजमार्ग है l
हेनरी डेविड
सब प्राणियों के श्रीदे में बसने वाले सर्व-व्यापक ईश्वर का उपदेश देने की अद्भुत सूक्ष्मता के कारण ही वास्तव में हिन्दू धर्म से अत्यंत प्रभावित हुआ हूँ l
सर विलियम्स जोन्स
जब हम वेदान्त और उस पर आधारित सुन्दर सत्साहित्य को पढ़ते हैं तब यह माने बिना नहीं रह सकते की पायथागोरस और प्लेटो ने उनके सूक्ष्म सिद्धांत भारतीय ऋषियों के मूल स्रोत से ही प्रान्त किये हैं l
यह है वास्तविकता ईसाई मिशनरियों द्वारा संचालित कान्वेंट स्कूलों की
गुजरात के प्रसिद्ध दैनिक गुजरात समाचार में छपी खबर के अनुसार अहमदाबाद के ओढव विस्तार के ईसाई मिशनरी संचालित होसन्ना मिशनरी स्कूल के संचालकों ने माला पहनने पर, तिलक लगाने पर, कंगन पहनने पर, पायल पहनने पर, एवं राष्ट्रगीत गाने पर प्रतिबन्ध लगाया है l
कुछ ख़ास वस्त्र पहनकर आने का सख्त आदेश दिया है, क्योंकि वे जानते हैं की इन चीजों के रहते हिन्दू बालकों में सनातन धर्म के संस्कार बने रहेंगे और उनको धर्मान्तरण कराने में मुश्किल होगी l इससे ऐसे गैर-कानूनी आदेशों का उल्लंघन करने वाले पर विद्यार्थियों को सख्त सजा देकर उनकी पिटाई की जाती है l
हाल ही में एक छात्र सलवार एवं पायल पहनकर तथा तिलक लगाकर स्कूल में आई तो शिक्षिका ने उसे लकड़ी से मारा l
इस दुष्कृत्य का दूसरी शिक्षिका ने विरोध किया तो उस शिक्षिका को पाठशाला से तुरंत ही निकाल दिया गया l
हालांकि ऐसी अन्यायपूर्ण नीति का विरोध करने के लिए सैकड़ों विद्यार्थी एवं उनके माता-पिता एकत्रित हो गए एवं संचालकों के विरोध में नारे लगाने लगे l इसके बाद पुलिस एवं गुजरात शिक्षाधिकारी के कार्यकाल में भी संचालकों के विरोध में शिकायत दर्ज करवाई l
स्पष्ट देखा जाता है की मिशनरियों द्वारा शिक्षा की आड़ में बालकों में हिन्दू संस्कृति के विरोधी कु-संस्कारों का सींचन करके उनका धर्मान्तरण करवाने का षड्यंत्र हमारे देश में तीव्र गति से बढ़ रहा है l माता पिता सोचते हैं की हमारे बच्चे मिशनरी स्कूलों में पढ़ कर जीवन में ज्यादा आगे बढ़ेंगे लेकिन उनको यह पता नहीं की धर्मान्तरण के अड्डे बन चुकी ये कु-पाठशालाएं बालकों के मस्तिष्क में सनातन संस्कृति, उनके रीति रिवाज़ एवं देवी-देवताओं के विरोध में मनगढ़ंत बातें भर कर उनको गुमराह करके ईसाई धर्म अपनाने के लिए प्रेरित कर रही है l
और इस कु-पष्ठ्शालाओं में पढ़ कर ज्यादातर बच्चे इतना आगे बढ़ जाते हैं की एक दिन नैतिकता में गिर ही जाते हैं अपने माता पिता को भी छोड़ दते हैं l
क्या हम अपने ही देश में पराये होना चाहते हैं ??
क्या हम फिर से गुलामी की जंजीरों में जकड़ना चाहते हैं ?
यदि नहीं तो आइये मिशनरियों के ऐसे षड्यंत्रों का सख्त विरोध करें एवं अपने बच्चों को ऐसे मिशनरी संचालित कु-पाठशालाओं में पढने भेज कर उनके भविष्य को अन्धकार में न डालें, और देश की स्वतंत्रता को खतरे में न देलीं l
धर्म परिवर्तन के ऐसे षड्यंत्रों से स्वयं सावधान रहें और सम्पर्क में आने वालों को भी सावधान करें l
जय श्री राम
जय भारत जय हो
Saturday, November 5, 2011
.**सारे मुसलमान बुरे नही होते**
1- हज़ारो साल से तैमूर, ग़ज़नी, गोरी जैसे दुर्दांत और हिंदू खून के प्यासे इस्लामिक हमलावरो के हज़ार हमले झेले, उस समय का एक भी मुसलमान हिंदू के साथ खड़ा नही दिखा.......फिर भी......**सारे मुसलमान बुरे नही होते**
2- हिंदू इन इस्लामिक हमलो मे अपना धन, veer योद्धा गवाया और अपनी घर की इज़्ज़त को हरम मे भेजने पर मजबूर हुआ,, उस समय का ए...क भी मुसलमान हिंदू के साथ खड़ा नही दिखा, फिर भी......**सारे मुसलमान बुरे नही होते**
3- बाबर, औरंगजेब जैसे क्रूर, निर्दयी नर पिसचो ने हर हिंदू तीर्थ स्थान पर अपनी नापाक मस्जिद खड़ी की अयोध्या, मथुरा, वाराणसी, ताजमहल आज भी गवाह है उस नापाक हरकत के,, उस समय का एक भी मुसलमान हिंदू के साथ नही खड़ा दिखा......फिर भी.....**सारे मुसलमान बुरे नही होते**
आज़ादी के 65 साल तक कम से कम अयोध्या, वाराणसी, मुंबई, देल्ही, गुजरात, जम्मू, आसां, बेंगलूर, भोपाल, कोलकाता छोटे बड़े मिला कर 2000 शुद्ध इस्लामिक आतंकवादी हमले हुए जिस मे कम से कम 200000 हिंदू अपनी जान गँवा चुके. इस संख्या मे कश्मीर मे हर दिन अपना सर कटा रहे भारत की सेना के जबाज़ नही शामिल है वरना ये 20 लाख पर कर जाएगी....फिर भी ...**सारे मुसलमान बुरे नही होते**.
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